गोरखपुर में टारगेट पूरा करने के लिए गश्ती टीम ने बदला रुख, अब इन इलाको में चालान काटने निकले

शहर में हेलमेट और सीट बेल्ट को लेकर बढ़ी जागरुकता के चलते आरटीओ के अफसरों को चालान का टारगेट पूरा करने के लिए गांव-कस्बों का रुख करना पड़ रहा है। बमुश्किल 20 दिन पहले 461 वाहनों के चालान का टॉरगेट पूरा करने में महज दो से तीन घंटे का समय लगता था, अब इसे पूरा करने में आठ घंटे तक पसीना बहाना पड़ रहा है।

 

आरटीओ विभाग की तरफ से सप्ताह में दो दिन हेलमेट और सीट बेल्ट को लेकर विशेष अभियान चलता है। पहले यह अभियान बुधवार को चलता था, लेकिन आम लोगों इसे लेकर सचेत होने के बाद यातायात निदेशालय 24 घंटे पहले अभियान के दिन के विषय में जानकारी देता है। आरटीओ के एक अधिकारी का कहना है कि पहली सितम्बर से नये ट्रैफिक कानून के बाद जुर्माने की राशि में बढ़ोतरी और कार्रवाई को लेकर तेजी से लोगों में हेलमेट और सीटबेल्ट को लेकर लोगों में भय दिख रहा है।

 

अधिकारियों का कहना है कि पहली सितम्बर से पहले बमुश्किल 10 से 15 फीसदी लोग ही हेलमेट या सीट बेल्ट लगाए मिलते थे, अब यह आंकड़ा उलट गया है। पहले दो से तीन घंटे में 100 से 120 चालान हो जाता था, अब छह से आठ घंटे के अभियान में 50 का भी आंकड़ा पूरा नहीं हो रहा है। आरटीओ की प्रवर्तन टीम टॉरगेट को पूरा करने के लिए गांव-कस्बों का रुख कर रही है।

 

सीट बेल्ट और हेलमेट को लेकर आरटीओ के प्रवर्तन के अधिकारियों को सप्ताह में दो दिन अभियान चलाना होता है। इसकी सूचना यातायात निदेशालय से 24 से 48 घंटे पूर्व मिलती है। इस बार का अभियान शुक्रवार और शनिवार को चलना है। गोरखपुर में पांच प्रवर्तन अधिकारियों की पोस्ट है। इसमें दो एआरटीओ प्रवर्तन और तीन यात्री कर अधिकारी की पोस्ट है। पांच अधिकारियों को लेकर यातायात निदेशालय प्रति सप्ताह 461 चालान का टॉरगेट देता है। वर्तमान में एक एआरटीओ और एक पीटीओ की पोस्ट है। एक अधिकारी को सप्ताह में 230 चालान का टॉरगेट मिलता है।

 

शहर में हेलमेट और सीट बेल्ट को लेकर लोगों में जागरुकता दिख रही है। यातायात निदेशालय से मिल रहे टॉरगेट को पूरा करने के लिए दो अधिकारी हैं। इन्हें गांव-कस्बों में भी भेजा जा रहा है। चालान का टॉरगेट पूरा करने के लिए तीन से चार थाना क्षेत्रों में कार्रवाई होती है।

– डीडी मिश्रा, आरटीओ प्रवर्तन

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