राजेश वर्मा, सीमा साहा, दारू का अड्डा, नाच और निगम की जीत, टोटल समीकरण और एक एक वोट का ये हिसाब

जिंदाबाद के नारे लगे और जश्न में मिठाई एक दूसरे को खिलाई गई। जीत के जश्न में जलसा और भोज तो पहले से ही चल रहा था, जिसका वीडियो वायरल भी हुआ था।

जैसी आशंका थी वही हुआ। भागलपुर नगर निगम के महापौर सीमा साह और उपमहापौर राजेश वर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देने वाले पार्षद ही बहस से नदारत रहे। निगम के उप नगर आयुक्त सत्येंद्र प्रसाद वर्मा ने बताया कि पचास पार्षदों में 20 नहीं पहुंचे और तीस हाजिर हुए, जिनमें आठ बैठक से निकल गए। बाकी बचे 22 ने इनके पक्ष में अपना समर्थन एकमत से कर दिया। नतीजतन अविश्वास प्रस्ताव गिर गया और वोटिंग की तो नौबत ही नहीं आई। महापौर सीमा साह ने शुशी जाहिर की और कहा हमारे काम की जीत है। दस्तखत करने वाले बीस पार्षद नहीं पहुंचे।

 

 

जिंदाबाद के नारे लगे और जश्न में मिठाई एक दूसरे को खिलाई गई। जीत के जश्न में जलसा और भोज तो पहले से ही चल रहा था, जिसका वीडियो वायरल भी हुआ था। अगले तीन साल के लिए कुर्सी सुरक्षित हुई। नगर निगम के इस बोर्ड को बने दो साल बीत चुके हैं और शहर गंदगी- संक्रामक बीमारी से जूझ रहा है। देश के स्मार्ट सिटी की पहली सूची में शुमार भागलपुर बद से बदतर हुआ है। कोई काम नहीं हुआ है। यह आरोप पार्षदों का ही है और एक हद तक यह सच भी है।

 

 

 

दरअसल 16 सितंबर को निगम के 22 पार्षदों ने बाकायदा दस्तखत कर महापौर और उपमहापौर के खिलाफ नगर आयुक्त को अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देते हुए जल्द बहस की मांग की थी। जिसमें इनपर जनोपयोगी कामों में ढिलाई, समय पर वार्ड पार्षदों के साथ बैठक न करने, पार्षदों व निगम के कर्मचारियों के साथ समन्वय न स्थापित करने और पार्षदों के साथ इनके गैर जिम्मेदाराना रवैए का आरोप लगाया । महापौर सीमा साह ने 25 सितंबर को इस पर बहस के लिए बैठक बुलाने का नगर आयुक्त को फरमान जारी किया।

 

 

इस बीच 22 सितंबर की रात एक वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। जिसमें निगम के बीस पार्षदों को नेपाल में शराबी फ़िल्म के एक गाने ” सलामे इश्क मेरी जान-” पर डांस करती बार बाला के ऊपर रुपए लुटाने, शराब की बोतल हाथों में ले नशे में उसके साथ नाचने का तमाशा था। इतना ही नहीं महिला पार्षद भी महफ़िल में लुत्फ उठाती दिख रही है । एक जनप्रतिनिधि का भाई रुपए लुटाने इन पार्षदों को देता भी दिख रहा है। जानकारों का मानना है कि यह प्रायोजित है।

 

 

 

उसी दिन से यह शंका जाहिर की जाने लगी थी कि अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले पार्षद गैरहाजिर रहेंगे। बुधवार को यह शक सही निकला। दस्तखत करने वाले 22 में से 20 पार्षद नदारत रहे। 30 हाजिर हुए तो आठ अपनी संख्या कम देख बैठक से निकल गए। बचे बाइस। इन सब ने महापौर सीमा साह और उपमहापौर राजेश वर्मा के समर्थन में अपनी आस्था व्यक्त की। बहस और मतदान की नौबत ही नहीं आई और मिनटों में फतह हो गई।

 

Girdhari Lal joshi, Jansatta

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