खाड़ी देश के लिए मोदी सरकार के केंद्र ने खोला दिल, लागू किया ज़बरदस्त स्कीम

केन्द्र सरकार के एक महत्वपूर्ण फैसले के बाद देश के अगरबत्ती में चल रहे व्यापक मंदी के बादल अब धीरे-धीरे छटने के आसार दिख रहे हैं। कभी पूरे विश्व पटल पर अगरबत्ती निमार्ण में अग्रणी स्थान रखने वाले गया की अगरबत्तियों की खुशबू खाड़ी के देशों तक फैलती थी लेकिन केन्द्र सरकार की उदारवादी नीति ने गया के अगरबत्ती उद्योग की कमर ही तोड़ डाली। चाइना और वियतनाम से इंपोर्ट होने वाली अगरबत्तियों के रेट में कमी का खामियाजा यहां के कुटीर उद्योग बन चुके अगरबत्ती उद्योग ने बुरी तरह भुगता। अब सरकार के फैसले से देसी अगरबत्ती उद्योग का भविष्य सुनहरा हो गया है।

 

 

चाईना और वियतनाम से 1.77 करोड़ डॉलर का था सालाना इंपोर्ट  
डायरेक्टर जनरल ऑफ फारेन ट्रेड के मुताबिक पूरे देश भर में चाइना और वियतनाम से अगरबत्ती और संबरनी कप जैसे जलने वाले सुगंधित उत्पादों का इंपोर्ट प्रतिवर्ष 1.77 करोड़ डालर का है। बहुतायत में हो रहे इंपोर्ट के कारण देश भर के अगरबत्ती उद्योग को बहुत बड़ी हानि हो रही थी। अगरबत्ती निमार्ता संघ के भारी दबाव के बाद केन्द्र सरकार ने चाइना और वियतनाम के इंपोर्ट को रोकने का फैसला किया है। हालांकि केन्द्र सरकार ने इस पर अभी पूरी तरह रोक नहीं लगाई है।

 

खाड़ी देशों तक हो रही है गया में बनी सुगंधित अगरबत्तियों की आपूर्ति
गया में बनी अगरबत्तियों की मांग बेंग्लोर, इंदौर, वाराणसी, जयपुर और अहमदाबाद में सर्वाधिक है। इन स्थानों पर तरह-तरह के फ्लेवर में अगरबत्तियां डिपिंग और पैकेजिंग होकर दुबई के रास्ते मिडिल ईस्ट के देशों के बाजारों में पहुंचती हैं। यहां की लोबान बत्ती, फलोरा बत्ती, ब्लैक बत्ती और हैंडमेड बड़े साईज की अगरबत्तियों की विदेशों में भारी डिमांड है। अगरबत्ती उद्योग से जुड़े कारोबारी शुभम कुमार भारती बतातें हैं कि गया के हैंडमेड अगरबत्तियों का डिमांड सबसे अधिक है।

 

 

चाइना से बनी अगरबत्तियां भारत में आने से शुरू हुई रेट में गिरावट
गया के अगरबत्ती उद्योग में बड़े कारोबारी मो.बादल, मो.अशरफ, राजेश कुमार प्रजापति, कृष्णा कुमार मंगलम बतातें हैं कि पहले गया में हैंड मेड अगरबत्तियां सबसे अधिक बनती थी। जब से चाइना और वियतनाम से बनी अगरबत्तियां इंडियन मार्केट में आनी शुरू हुई रेट में जबरदस्त गिरावट आने लगी। रेट में गिरावट होने का खामियाजा ग्रामीण महिलाओं को उठाना पड़ा उनकी भी मजदूरी आधी हो गई। मजबूर होकर उन्हें दूसरे कामों में लग जाना पड़ा।

 

 

सरकार के फैसले से लौटेगी अगरबत्ती उद्योग की चमक
अगरबत्ती निमार्ता राजेश कुमार बतातें हैं कि मोदी सरकार के फैसले कुछ महीने के भीतर ही अगरबत्ती उद्योग को पुनर्जीवित कर देगी। कुमार बतातें हैं कि पूरे गया जिले में लगभग 2500 ऑटो फीडर मशीन से अगरबत्ती बन रही है। इसके अलावे पैडल से चलने वाले मशीन से भी अगरबत्ती बनायी जाती है। दूसरी ओर मो. बादल का कहना है कि सरकार विदेशों से आयात किये जाने वाले अगरबत्तियों पर 40 प्रतिशत का टैक्स लगाए। पूरे देश भर में अगरबत्ती का कारोबार लगभग 8000 करोड़ रुपए से अधिक का है।

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